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भारतवर्ष के पावन प्रांत मध्यप्रदेश के अंतर्गत पवित्र बुंदेलखंड क्षेत्र में महाराज जी का जन्म हुआ। बचपन से ही उनमें धर्म, साधना और अध्ययन के प्रति गहरी रुचि रही। मात्र 12–13 वर्ष की आयु में वे संस्कृत अध्ययन के लिए वृंदावन पहुँचे, जहाँ उन्होंने श्री रामानंद सम्प्रदाय के अंतर्गत श्री मलूकदास जी महाराज के अखाड़े में रहकर गहन आध्यात्मिक साधना और शिक्षा ग्रहण की। इस दौरान उन्हें जगद्गुरु द्वाराचार्य महाराज जी से दीक्षा और आध्यात्मिक मार्गदर्शन प्राप्त हुआ। तत्पश्चात उन्होंने संपूर्ण आनंद विश्वविद्यालय से शास्त्रीय और आचार्य की शिक्षा पूर्ण की।
शास्त्रीय शिक्षा पूर्ण करने के पश्चात महाराज जी ने विरक्त दीक्षा धारण की और भारतीय संस्कृति तथा सनातन धर्म के प्रचार-प्रसार का संकल्प लिया। धर्म और अध्यात्म को जन-जन तक पहुँचाने के उद्देश्य से वे सतत कार्यरत रहे। जगद्गुरु रामगोपाल दास जी महाराज तथा श्री राम मंदिर पंचकुइया के महामंडलेश्वर लक्ष्मण दास जी महाराज के आशीर्वाद और मार्गदर्शन में महाराज जी वृंदावन से इंदौर लाए गए।
वर्ष 2016 के सिंहस्थ कुंभ में महाराज जी को श्री राम मंदिर गंगा बगिची, इंदौर के महामंडलेश्वर पद पर आसीन किया गया, जो सम्पूर्ण साधु-संत समाज और भक्तजनों के लिए अत्यंत गौरव का विषय था। महंत लक्ष्मण दास जी महाराज के साकेतवासी होने के पश्चात, उनकी इच्छा और संत समाज की सर्वसम्मति से, दिनांक 24 दिसंबर 2023 को महाराज जी को श्री राम मंदिर पंचकुइया आश्रम की गद्दी पर विराजमान किया गया।
श्री राम मंदिर पंचकुइया आश्रम की सभी सेवाएं और गतिविधियां भक्तों के सहयोग और आशीर्वाद से निरंतर संचालित होती हैं। आपका दिया हुआ हर छोटा-बड़ा योगदान, सेवा और भक्ति के कार्यों को और भी मजबूत बनाता है। आपके सहयोग से आश्रम में गौशाला का संचालन, गायों के भोजन और चिकित्सा की व्यवस्था, साधु-संतों के आवास और भोजन की सेवा, पक्षियों के लिए दाना-पानी की व्यवस्था, गुरुकुल में निःशुल्क शिक्षा और बच्चों की आवश्यकताओं की पूर्ति, धार्मिक आयोजनों और भंडारों का संचालन, तथा स्वास्थ्य शिविर और चिकित्सा सेवा जैसे कार्य सुचारु रूप से चलते हैं।
आपके द्वारा दिया गया दान हमारे मंदिरों की देखभाल, धार्मिक आयोजन और सेवा कार्यों में उपयोग किया जाता है।